आज के इस आर्टिकल में हम एक ऐसे विषय के बारे में बात करने जा रहे है जो हर कर्मचारी के लिए उपयोगी है। कर्मचारियों को मिलने वाला बोनस PAYMENT OF BONUS ACT, 1965 के आधार पर तय होता है। इसी अधिनियम के बारे में हम आज के आर्टिकल में चर्चा करेंगे।
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बोनस एक्ट का पेमेंट
सन 1965 में भारत सरकार ने बोनस एक्ट पेमेंट अधिनियम लागु किया जिसके अनुसार जिन कर्मचारियों की तनख्वाह एक निश्चित सीमा से कम है उनको एक न्यूनतम गारंटीड बोनस का भुगतान किया जाएगा।
इस अधिनियम के अनुसार – ” साल 1979 तथा उसके बाद के वित्तीय वर्षों में एक Employer को अनिवार्य रूप से अपने कर्मचारियों को उनकी सैलरी या Wage का न्यूनतम 8.33% या 100 रूपये में से जो भी ज्यादा है उतने बोनस का भुगतान करना पड़ेगा।”
इसके अनुसार आप अपने (BASIC + DA) Wage का न्यूनतम 8.33% से लेकर अधिकतम 20% तक बोनस प्राप्त कर सकते है लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि यह बोनस केवल 7,000 रूपये पर ही कैलकुलेट किया जाता है इसका मतलब अगर आपकी सैलरी 10,000 रूपये है तो भी आपका बोनस केवल 7000 रुपयों पर ही कैलकुलेट किया जाएगा।
बोनस एक्ट में 2015 में किए गए संशोधन
“अगर किसी कर्मचारी की तनख्वाह 7,000 रूपये से अधिक है तो भी उसके बोनस की गणना केवल 7,000 रूपये या फिर सम्बंधित सरकार के रोजगार सम्बन्धी नियमों के न्यूनतम Wage, में से जो भी राशि अधिक होगी उसके आधार पर की जाएगी”
अगर आप इस नियम को पढ़ने के बाद अभी भी दुविधा में है तो ज्यादा जानकारी के लिए आप हमारे इस वीडियो को देख सकते है –
बोनस की कैलकुलेशन
- Basic Pay :- यह किसी भी कर्मचारी के वेतन का मुख्य भाग होता है। यानी किसी भी प्रकार की योजनाओं का पैसा जोड़े बिना या काटे बिना इसकी कैलकुलेशन होती है।
- Grade Pay :- सरकारी कर्मचारियों को उनके पद के अनुसार Grade Pay का लाभ मिलता है।
- Allowance :- यह वो राशि है जो कर्मचारी को किसी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर सैलरी के अलावा मिलती है जैसे परिवहन, हाउसिंग, स्वास्थ्य सम्बन्धी कारण आदि।
- DA (Dearness Allowance) :- यह आपके (Basic Pay + Grade Pay) का एक हिस्सा है जो इन्फ्लेशन के अनुसार कम-ज्यादा हो सकता है।
आइये इसको कुछः उदाहरणों की सहायता से समझते है –
- माना कि आपका (Basic + DA) 5,000 रूपये है तो आपका न्यूनतम बोनस 8.33% होगा जो कि 416.5 रूपये है।
- माना कि आपका (Basic + DA) 8,000 रूपये है तथा आप राजस्थान के रहने वाले है जहां न्यूनतम Wage 5720 रूपये प्रति महीना है तो आपका न्यूनतम बोनस 7,000 रुपयों का 8.33% होगा।
- माना कि आपका (Basic + DA) 8,000 रूपये है तथा आप दिल्ली में रहते हो जहां न्यूनतम Wage 13,000 रूपये प्रति महीना है तो आपका न्यूनतम बोनस भी 13,000 का 8.33% होगा क्योंकि वहां पर न्यूनतम Wage 7,000 रूपये से ज्यादा है।
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कंपनियों के लिए सामान्य पात्रता (2018)
जब आप किसी नई नौकरी में शामिल होते हैं, तो आपका Employment Contract बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसको समझना और सही से पढ़ना आपके भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए आप हमारे ब्लॉग Employment Contract: Why and How Should You Read It? को पढ़ सकते हैं।
आपकी कंपनी इस एक्ट के अंतर्गत आती है नहीं? यह जानने के लिए आपको निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए –
- कंपनी न्यूनतम 5 वर्ष पुरानी होनी चाहिए।
- कंपनी प्रॉफिटेबल होनी चाहिए।
- कंपनी में न्यूनतम 20 कर्मचारी होने चाहिए।
कर्मचारियों के लिए बोनस की पात्रता (2018)
कार्यस्थल पर अनुशासन और आचरण बनाए रखना सभी के लिए जरूरी है। कार्यस्थल पर अनुचित आचरण को समझने के लिए हमारे ब्लॉग Understanding Workplace Misconduct in India को पढ़ें। यह ब्लॉग आपको विभिन्न प्रकार के अनुचित आचरण और उनसे निपटने के तरीके के बारे में बताएगा।
अगर आप इन शर्तों को पूरा करते है तो आप बोनस के लिए योग्यता रखते है –
- आपकी तनख्वाह 21,000 रूपये पार्टी महीन से कम होनी चाहिए।
- एक वर्ष में आपको न्यूनतम 30 दिन काम पर उपस्थित रहना होगा।
वह अधिकतम समय जिसके बाद आपको बोनस मिलना चाहिए
कई बार कंपनियां अपने कर्मचारियों से Employment Bond पर हस्ताक्षर करवाती हैं, जिससे निकलना काफी कठिन हो सकता है। अगर आप भी ऐसे किसी बॉन्ड से बाहर निकलना चाहते हैं तो हमारे ब्लॉग How to Get Out of Your Employment Bond को पढ़ें। इस ब्लॉग में आपको इस स्थिति से निपटने के लिए उपयोगी टिप्स मिलेंगे।
सरकारी नीतियों के अनुसार प्रत्येक वित्त वर्ष के पूर्ण होने के 8 महीनों बाद लगभग बोनस दे दिया जाना चाहिए। चूँकि भारत में वित्त वर्ष मार्च में पूरा होता है इसलिए अक्टूबर-नवंबर के आसपास बोनस मिलना चाहिए। इसलिए ज्यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों को दीवाली के समय पर बोनस देने को प्राथमिकता देती है।
हम यह आशा करते है कि यह आर्टिकल आपके लिए लाभदायक साबित होगा।
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FAQs
बोनस एक्ट 1965 एक ऐसा कानून है जिसे भारत सरकार ने लागू किया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन कर्मचारियों की तनख्वाह एक निश्चित सीमा से कम है, उन्हें उनकी सैलरी का एक न्यूनतम हिस्सा बोनस के रूप में मिले। इसके तहत कर्मचारियों को न्यूनतम 8.33% या 100 रुपये में से जो भी अधिक हो, उतने बोनस का भुगतान किया जाता है।
बोनस की गणना कर्मचारी के (Basic + DA) के आधार पर की जाती है। न्यूनतम बोनस 8.33% और अधिकतम 20% तक हो सकता है। हालांकि, यह गणना केवल 7,000 रुपये तक की जाती है, भले ही कर्मचारी की सैलरी उससे अधिक हो। 2015 के संशोधन के अनुसार, यदि कर्मचारी की सैलरी 7,000 रुपये से अधिक है, तो भी बोनस की गणना 7,000 रुपये या न्यूनतम वेतन में से जो भी अधिक हो, उसके आधार पर की जाएगी।
बोनस एक्ट के तहत वे कंपनियां आती हैं जो न्यूनतम 5 साल पुरानी हों, प्रॉफिटेबल हों, और जिनमें कम से कम 20 कर्मचारी कार्यरत हों। इस एक्ट के तहत आने वाली कंपनियों को अपने कर्मचारियों को बोनस का भुगतान करना अनिवार्य होता है।
बोनस के लिए कर्मचारी की पात्रता के लिए उसकी तनख्वाह 21,000 रुपये प्रति माह से कम होनी चाहिए। इसके अलावा, कर्मचारी को उस वित्तीय वर्ष में कम से कम 30 दिन काम पर उपस्थित रहना अनिवार्य है। यह शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारी बोनस पाने के योग्य होते हैं।
सरकारी नीतियों के अनुसार, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के पूर्ण होने के 8 महीने के भीतर कर्मचारियों को बोनस का भुगतान कर दिया जाना चाहिए। भारत में वित्तीय वर्ष मार्च में समाप्त होता है, इसलिए अक्टूबर-नवंबर के आसपास कर्मचारियों को बोनस मिलना चाहिए। आमतौर पर, कंपनियां दीवाली के समय बोनस देने को प्राथमिकता देती हैं।
2015 में किए गए संशोधन के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की सैलरी 7,000 रुपये से अधिक है, तो भी उसके बोनस की गणना 7,000 रुपये या सम्बंधित सरकार के रोजगार सम्बन्धी नियमों के अनुसार निर्धारित न्यूनतम वेतन में से जो भी अधिक हो, उसके आधार पर की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कर्मचारियों को उनके उचित हक का बोनस मिले।


